Monday, 29 August 2016

मिड डे मील कांड में प्राचार्या को 17 वर्ष की सजा

मिड डे मील कांड में प्राचार्या को 17 वर्ष की सजा

बिहार के छपरा में तीन वर्ष पूर्व विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत होने के मामले में स्कूल की तत्कालीन प्राचार्या को अदालत ने दो अलग-अलग धाराओं में कुल सत्रह साल की सजा सुनाई है। सोमवार को खचाखच भरी अदालत में इस मामले में दोषी पाई गई प्रिंसिपल मीना देवी को ये सजा सुनाई गई।मशरख प्रखंड के गंडामन विद्यालय के उपरोक्त मामले की मुख्य आरोपी मीना देवी को एडीजे द्वितीय की अदालत ने आईपीसी की धारा 304 भाग 2 में 10 वर्ष सश्रम कारावास व ढाई लाख रुपये अर्थदंड और 308 भाग 2 में 7 वर्ष सश्रम व सवा लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही कहा है कि दोनों सजा अलग अलग चलेंगी। पहले 10 वर्ष काटने के बाद दूसरा 7 वर्ष शुरू होगा। अर्थ दंड की राशि से 20 प्रतिशत सरकार के खाते में और बाकी रकम मृत बच्चों के परिजनों में बराबर-बराबर बांट दिया जाए ।अदालत ने ने दोषी को दफा 302 के तहत दस वर्ष और दफा 308 के तहत सात वर्ष की सजा सुनाई। अदालत से सजा सुनाते ही प्रिंसिपल मीना देवी का धैर्य जवाब दे गया और वो फूट-फूट कर रोने लगी। इससे पहले 24 अगस्त को छपरा अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद स्कूल की तत्कालीन प्रिंसिंपल मीना देवी को दोषी करार दिया था। छपरा में एडीजे 2 की अदालत ने मुख्य आरोपी मीना देवी को 304 और 308 दफा के तहत दोषी करार दिया था जबकि उनके पति अर्जुन राय को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।बिहार के सारण जिले के मशरख प्रखंड के धर्मासती गंडामन स्कूल में 16 जुलाई 2013 को मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी। 2013 में यह घटना बिहार की राजधानी पटना से 60 किमी दूर और छपरा से 25 किमी दूर मशरख ब्लॉक के दहरमासती गंडामन गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। मिड डे मील में बच्चों को दाल, चावल और सोयाबीन की सब्जी दी गई थी जिसे खाने के तुरंत बाद बच्चे बीमार होने लगे थे।

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