मुसलमानों के पैरोकार हासिम अंसारी नहीं रहे,अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अखाड़ा परिषद करेगा पहल
बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि के सबसे उम्रदराज़ मुद्दई हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में बुधवार सुबह अयोध्या में निधन हो गया है। वह लम्बे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने अयोध्या स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनकी मौत का पता परिवार के लोगों को तब चला जब बुधवार सुबह वह नमाज़ के लिए नहीं उठे। 60 साल से ज़्यादा समय तक बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले हाशिम अंसारी के स्थानीय हिंदू साधु-संतों से रिश्ते कभी ख़राब नहीं हुए। साल 2014 में बाबरी मस्जिद मुद्दे के राजनीतिकरण से वे नाराज हो गए थे। उन्होंने कहा था कि अब रामलला को वह आजाद देखना चाहते हैं। वह अब किसी भी कीमत पर बाबरी मस्जिद के मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। छह दिसंबर को काला दिवस जैसे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।अयोध्या मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी की मौत पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी की मौत से अयोध्या विवाद के आपसी सहमति से सुलझने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.अयोध्या मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी की मौत पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी की मौत से अयोध्या विवाद के आपसी सहमति से सुलझने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.उनके मुताबिक़ अयोध्या विवाद में अब सियासी पार्टियों व नेताओं को अलग कर कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से मामले को सुलझा लेना ही हाशिम अंसारी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी ने दो दिन पहले भी उन्हें फोन कर विवाद का निपटारा जल्द होने की इच्छा जताई थी. उनके मुताबिक़ हाशिम अंसारी की इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए अखाड़ा परिषद अब आपसी बातचीत शुरू कराने की पहल खुद करेगा.इसके तहत विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों और दोनों धर्मों के धर्मगुरुओं को बुलाया जाएगा , लेकिन इस बैठक से सियासी पार्टियों के नेताओं को अलग रखा जाएगा.
बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि के सबसे उम्रदराज़ मुद्दई हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में बुधवार सुबह अयोध्या में निधन हो गया है। वह लम्बे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने अयोध्या स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनकी मौत का पता परिवार के लोगों को तब चला जब बुधवार सुबह वह नमाज़ के लिए नहीं उठे। 60 साल से ज़्यादा समय तक बाबरी मस्जिद की क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले हाशिम अंसारी के स्थानीय हिंदू साधु-संतों से रिश्ते कभी ख़राब नहीं हुए। साल 2014 में बाबरी मस्जिद मुद्दे के राजनीतिकरण से वे नाराज हो गए थे। उन्होंने कहा था कि अब रामलला को वह आजाद देखना चाहते हैं। वह अब किसी भी कीमत पर बाबरी मस्जिद के मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। छह दिसंबर को काला दिवस जैसे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।अयोध्या मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी की मौत पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी की मौत से अयोध्या विवाद के आपसी सहमति से सुलझने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.अयोध्या मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी की मौत पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी की मौत से अयोध्या विवाद के आपसी सहमति से सुलझने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.उनके मुताबिक़ अयोध्या विवाद में अब सियासी पार्टियों व नेताओं को अलग कर कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से मामले को सुलझा लेना ही हाशिम अंसारी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि हाशिम अंसारी ने दो दिन पहले भी उन्हें फोन कर विवाद का निपटारा जल्द होने की इच्छा जताई थी. उनके मुताबिक़ हाशिम अंसारी की इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए अखाड़ा परिषद अब आपसी बातचीत शुरू कराने की पहल खुद करेगा.इसके तहत विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों और दोनों धर्मों के धर्मगुरुओं को बुलाया जाएगा , लेकिन इस बैठक से सियासी पार्टियों के नेताओं को अलग रखा जाएगा.

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