Sunday, 5 June 2016

वनों को नष्ट करना, मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक है

वनों को नष्ट करना, मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक है


प्राचीन काल में हरे वृक्षों को काटना वर्जित था। उस समय का समाज यह भलीभाति जानता था कि पौधों को काटना और
वनों को नष्ट करना, मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक है, क्योंकि इनके अभाव में बीमारिया फैलती है और
पर्यावरण प्रदूषित होता है। पर्यावरण संरक्षित रह सके, शायद इसीलिये विश्व पृथ्वी दिवस ( 22 अपैल ), विश्व ओजोन दिवस
( 16 सितंबर ), वने-महोत्सव दिवस (28 जुलाई ) और विश्व पर्यावरण दिवस ( 5 जून ) आदि जैसे महत्वपूर्ण आयोजन
निर्धारित कर उनके उदेश्यों को आम जनता तक पहुंचाकर विश्व स्तर पर पर्यावरण संतुलन एवं संरक्षण के प्रति जागृति पैदा
करना और विभित्र उपायों की खोज करना है। इस तरह ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ को हम तभी सार्थकता दे सकेंगे जब विश्व
स्तर पर आम जनता भी इसके निंर्धारित उदेश्यों को समझकर पर्यावरण संतुलन - संरक्षण करने की चेतना को अपने भीतर
जागृत कर सके। आज प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जिस तरह से और जिस स्तर पर किया जा रहा है, उससे पर्यावरण को
निरंतर खतरा बढ़ता जा रहा है।

No comments:
Write comments

Recommended Posts × +