Wednesday, 22 June 2016

प्रधानमंत्री मोदी उज़्बेकिस्तान में चीन और रूस के राष्ट्रपतियों से मिलेंगे : विदेश मंत्रालय

प्रधानमंत्री मोदी उज़्बेकिस्तान में चीन और रूस के राष्ट्रपतियों से मिलेंगे : विदेश मंत्रालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दो दिवसीय यात्रा पर उज़्बेकिस्तान जाएंगे जहां वह ताशकंद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भाग लेंगे Iविदेश मंत्रालय ने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे I वह उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति करीमोव से भी मिलेंगे I यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तानी राष्ट्रपति, जिनके एससीओ में आने की सम्भावना है, से भी मिलेंंगे, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कुछ कहने से इनकार किया और कहा कि अभी तक कोई भी औपचारिक समाचार नहीं है कि पाकिस्तान से एससीओ बैठक में भाग लेने कौन आ रहा है I चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के विषय में चीन के समर्थन पर विचार विमर्श करेंगेI आधिकारिक तौर पर इस बैठक की पुष्टि नहीं हो पायी हैI एससीओ यूरेशिया का एक राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संगठन है जिसे चीन के शहर शंघाई में 2001 में रूस, चीन, कजाखस्तान, किर्गीज़िस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने मिलकर बनाया थाI चीन अभी तक यह कह कर एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन नहीं कर रहा कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं I एनएसजी की दो दिवसीय बैठक 23-24 जून को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में हो रही हैI इसलिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की यह चर्चा भारत की सदस्य्ता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयत्न होगाI चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि 48 सदस्यीय एनएसजी समूह में सहमति नहीं हो पायी है कि क्या उन देशों को जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, एनएसजी में शामिल किया जाये या नहीं I इसलिए चीन के समक्ष समस्या है कि क्या सदस्य देशों में कोई सहमति हो सकती है कि कोई एक देश सदस्य बन सकता है या नहीं I प्रवक्ता ने कहा कि चीन का विरोध किसी एक देश के विरुद्ध नहीं हैI
एक प्रश्न के उत्तर में प्रवक्ता ने कहा कि इस विषय पर अमेरिका ने भी भारत का समर्थन किया है, उन्होंने अमेरिका का ऐसा कोई वक्तव्य नहीं देखाI परन्तु अमेरिका स्वयं एक ऐसा देश है जिसने यह नियम बना दिया है कि कोई भी देश जिसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, एनएसजी का सदस्य नहीं बन सकताI

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