गुलबर्ग दंगा केस में सजा का ऐलान, 11 दोषियों को उम्रकैद और 12 दोषियों को 7-7 साल की कैद
साल 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में एसआईटी की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को 24 दोषियों की सजा का ऐलान कर दिया। गौर हो कि इस मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी। जानकारी के अनुसार, विशेष अदालत ने इनमें से 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा और 12 दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। वहीं, एक अन्य दोषी को दस साल की सजा दी गई है। करीब 14 साल बाद दोषियों को सजा मिली है।इससे पहले, विशेष अदालत के न्यायाधीश पीबी देसाई ने अभियोजन, बचाव पक्ष के साथ-साथ पीड़ितों के वकील ने दलीलें पूरी होने के बाद घोषणा की थी कि सजा शुक्रवार को सुनाई जाएगी। इससे पहले दो जून को अदालत ने हत्या और अन्य अपराधों के लिए 11 लोगों को दोषी ठहराया था जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य समेत 13 अन्य हल्के अपराधों के तहत दोषी ठहराए गए थे। अदालत ने इस मामले में 36 अन्य को बरी कर दिया था।बड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों में मुख्य आरोपियों में एक कैलाश धोबी भी शामिल है जिसने 13 जून को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया जब न्यायाधीश ने सजा सुनाने पर सुनवाई पूरी कर ली। धोबी को 2002 में गिरफ्तार किया गया था और इस साल फरवरी में अस्थायी जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित एसआईटी का प्रतिनिधित्व कर रहे लोक अभियोजक आर सी कोडेकर ने अदालत से कहा कि 24 दोषियों को मृत्युदंड या जीवन पर्यंत कारावास से कम सजा नहीं सुनाई जानी चाहिए।पीड़ितों के वकील एसएम वोरा ने भी आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की और दलील दी कि प्रत्येक अपराध के लिए सजा साथ-साथ नहीं चलनी चाहिए, जिससे वे पूरा जीवन जेल में बिताएं। आरोपी अजय भारद्वाज के वकील ने मृत्युदंड या अधिकतम सजा की मांगों का अपनी दलीलों में यह कहते हुए विरोध किया घटना स्वत: थी और इसके लिए पर्याप्त उकसावा था। गुलबर्ग सोसाइटी मामला यहां 28 फरवरी 2002 को हुआ था। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसने पूरे देश को दहला दिया था क्योंकि तकरीबन 400 लोगों की उग्र भीड़ ने अहमदाबाद के केंद्र में स्थित सोसाइटी पर हमला किया था और जाफरी समेत निवासियों की हत्या कर दी थी।
साल 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में एसआईटी की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को 24 दोषियों की सजा का ऐलान कर दिया। गौर हो कि इस मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी। जानकारी के अनुसार, विशेष अदालत ने इनमें से 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा और 12 दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। वहीं, एक अन्य दोषी को दस साल की सजा दी गई है। करीब 14 साल बाद दोषियों को सजा मिली है।इससे पहले, विशेष अदालत के न्यायाधीश पीबी देसाई ने अभियोजन, बचाव पक्ष के साथ-साथ पीड़ितों के वकील ने दलीलें पूरी होने के बाद घोषणा की थी कि सजा शुक्रवार को सुनाई जाएगी। इससे पहले दो जून को अदालत ने हत्या और अन्य अपराधों के लिए 11 लोगों को दोषी ठहराया था जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य समेत 13 अन्य हल्के अपराधों के तहत दोषी ठहराए गए थे। अदालत ने इस मामले में 36 अन्य को बरी कर दिया था।बड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों में मुख्य आरोपियों में एक कैलाश धोबी भी शामिल है जिसने 13 जून को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया जब न्यायाधीश ने सजा सुनाने पर सुनवाई पूरी कर ली। धोबी को 2002 में गिरफ्तार किया गया था और इस साल फरवरी में अस्थायी जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित एसआईटी का प्रतिनिधित्व कर रहे लोक अभियोजक आर सी कोडेकर ने अदालत से कहा कि 24 दोषियों को मृत्युदंड या जीवन पर्यंत कारावास से कम सजा नहीं सुनाई जानी चाहिए।पीड़ितों के वकील एसएम वोरा ने भी आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की और दलील दी कि प्रत्येक अपराध के लिए सजा साथ-साथ नहीं चलनी चाहिए, जिससे वे पूरा जीवन जेल में बिताएं। आरोपी अजय भारद्वाज के वकील ने मृत्युदंड या अधिकतम सजा की मांगों का अपनी दलीलों में यह कहते हुए विरोध किया घटना स्वत: थी और इसके लिए पर्याप्त उकसावा था। गुलबर्ग सोसाइटी मामला यहां 28 फरवरी 2002 को हुआ था। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसने पूरे देश को दहला दिया था क्योंकि तकरीबन 400 लोगों की उग्र भीड़ ने अहमदाबाद के केंद्र में स्थित सोसाइटी पर हमला किया था और जाफरी समेत निवासियों की हत्या कर दी थी।

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