नंद कुमार की छुट्टी होना लगभग तय ! नये बीजेपी अध्यक्ष की चर्चा पर असमंजस !
क्या मध्यप्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर कोई नया चेहरा होगा??
नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में अमित शाह को अध्यक्ष पद पर लिया था, या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सहमति से किसी वरिष्ठ को ये पद सौंपा जाएगा या वर्तमान अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान को पुन: ये जवाबदारी दी जाएगी?ये सवाल मध्य प्रदेश बीजेपी में इसलिए उभर कर सामने आ रहे है कि जनवरी अंत तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति होनी है, हालांकि अभी पार्टी के संघठन के चुनाव की प्रक्रिया निचले स्तर पर जारी है। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष को लेकर नेताओं की जोर आजमाईश भी शुरू हो गई है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं और पार्टी के दिल्ली मुख्यालय तक जारी हैवर्तमान अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान को, प्रदेश अध्यक्ष पद पर कार्य कर रहे नरेन्द्र सिंह तोमर को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में लिए जाने से, उनके शेष समय के लिए अध्यक्ष बनाया गया था।रतलाम-झाबुआ लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार और देवास विधानसभा में जनाधार खिसकने से संघ एवं बीजेपी के दिग्गज भी चिंतित हैं। इसलिए नये अध्यक्ष के चयन में यह मुद्दा भी अहम रहेगा। पार्टी हाइकमान ने फिलहाल इस बारे में अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन अंदर खानों की खबर है कि जिस तरह सवा साल पहले चौहान की ताजपोशी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन की अनुशंसा को महत्व दिया गया था, वैसे ही इस बार भी नये अध्यक्ष को शिवराजसिंह की मर्जी के बगैर नही चुना जाएगा।प्रदेश में वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव कराने की अहम जवाबदारी भी इसी चयनित अध्यक्ष के सर होगी! वैसे भी केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी नंदकुमार चौहान के साथ है!शिवराज सिंह कभी भी बिना संघ को साथ लिए अपना कोई भी फैसला नही करेंगें ये सब जानते है। झाबुआ की हार के बाद वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव उनके सामने होगा, वे अध्यक्ष अपनी पसंद का ही रखेंगे ताकि पार्टी और सरकार का समन्वय बना रहे। तालमेल की इसी रणनीति के तहत वे संघ और केन्द्रीय पार्टी की रायशुमारी के बाद ही अपना साथी चुनेगे।
नरेन्द्र मोदी ने केंद्र में अमित शाह को अध्यक्ष पद पर लिया था, या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सहमति से किसी वरिष्ठ को ये पद सौंपा जाएगा या वर्तमान अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान को पुन: ये जवाबदारी दी जाएगी?ये सवाल मध्य प्रदेश बीजेपी में इसलिए उभर कर सामने आ रहे है कि जनवरी अंत तक प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति होनी है, हालांकि अभी पार्टी के संघठन के चुनाव की प्रक्रिया निचले स्तर पर जारी है। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष को लेकर नेताओं की जोर आजमाईश भी शुरू हो गई है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं और पार्टी के दिल्ली मुख्यालय तक जारी हैवर्तमान अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान को, प्रदेश अध्यक्ष पद पर कार्य कर रहे नरेन्द्र सिंह तोमर को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में लिए जाने से, उनके शेष समय के लिए अध्यक्ष बनाया गया था।रतलाम-झाबुआ लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार और देवास विधानसभा में जनाधार खिसकने से संघ एवं बीजेपी के दिग्गज भी चिंतित हैं। इसलिए नये अध्यक्ष के चयन में यह मुद्दा भी अहम रहेगा। पार्टी हाइकमान ने फिलहाल इस बारे में अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन अंदर खानों की खबर है कि जिस तरह सवा साल पहले चौहान की ताजपोशी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन की अनुशंसा को महत्व दिया गया था, वैसे ही इस बार भी नये अध्यक्ष को शिवराजसिंह की मर्जी के बगैर नही चुना जाएगा।प्रदेश में वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव कराने की अहम जवाबदारी भी इसी चयनित अध्यक्ष के सर होगी! वैसे भी केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी नंदकुमार चौहान के साथ है!शिवराज सिंह कभी भी बिना संघ को साथ लिए अपना कोई भी फैसला नही करेंगें ये सब जानते है। झाबुआ की हार के बाद वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव उनके सामने होगा, वे अध्यक्ष अपनी पसंद का ही रखेंगे ताकि पार्टी और सरकार का समन्वय बना रहे। तालमेल की इसी रणनीति के तहत वे संघ और केन्द्रीय पार्टी की रायशुमारी के बाद ही अपना साथी चुनेगे।

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