Saturday, 21 November 2015

MBBS करने की चाह रखने वाले छात्रों को लगेगा बड़ा झटका

पेपर लीक के बाद चर्चाओं में आए ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल टेस्ट (एआईपीएमटी) का तीन साल पुराना पैटर्न दोबारा लौट रहा है। इससे एमबीबीएस में दाखिला लेने की चाह रखने वालों को झटका लग सकता है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की हाल ही में हुई बैठक में तय किया गया है कि पेपर लीक और दूसरे फर्जीवाड़े रोकने के लिए प्री और मेंस परीक्षा का पैटर्न दोबारा लागू किया जाए। इस पर जल्द अंतिम मुहर लगेगी। देशभर के मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए वर्ष 2012 तक एआईपीएमटी प्री और मेंस परीक्षा होती थी। प्री परीक्षा क्वालिफाई करने वाले युवा ही मेंस परीक्षा में शामिल होते थे। वर्ष 2013 में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) परीक्षा हुई।इसके बाद 2014 और 2015 में दोबारा एआईपीएमटी हुई, लेकिन यहां केवल एक परीक्षा ही आयोजित कराई गई। इस साल हुई परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे। इस नाते हाल ही में हुई बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि वर्ष 2016 से दोबारा एआईपीएमटी में दो परीक्षाएं (प्रारंभिक और मुख्य) आयोजित कराई जाएंगी।इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस बैठक में बोर्ड के चेयरमैन व अधिकारियों के साथ ही अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ राज्यों ने इस पर आपत्ति जताई है कि इससे परीक्षा में देरी होगी और फीस ज्यादा लगेगी।
इस पर बोर्ड ने साफ किया है कि परीक्षा शुल्क एक बार ही लिया जाएगा। प्रस्ताव पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है। बोर्ड का तर्क है कि दो परीक्षाएं होने से न तो पेपर लीक का खतरा रहेगा और न कोई गलत तरीके से एमबीबीएस का दाखिला पा सकेगा।

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