Tuesday, 10 November 2015

बैतूल में 400 सालों से लगता आ रहा है 'भूतों का मेला'



भारत मेलों का देश है. आज विश्व के सामने हमारी सभ्यता ही हमारी पहचान बन चुकी है. आपने बहुत सारे मेलों के बारे में सुना होगा, आप कई मेलों में शरीक़ भी हुए होंगे, लेकिन क्या आपने कभी "भूतों के मेले" के बारे में सुना है? अगर आपने नहीं सुना है तो आपको बता दें कि बैतूल जिले से 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे मलाजपुर गांव में हर साल "भूतों का मेला" लगता है. इस मेले के दौरान यहां देशभर से लोग आते हैं. जिन लोगों पर प्रेत की छाया है उनकी चीख-चिल्लाहट यहां सुनी जा सकती है. चलिए आपको बताते हैं गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में आदिवासी ज़्यादा हैं. इन लोगों में भूत-प्रेतों को झाड़ू से भगाने की प्रथा है और बैतूल भी आदिवासी बहुल जिलों में से एक है. सच सिवाय विश्वास के और कुछ नहीं है. लोग आते हैं, उनकी दिक्कतें दूर होती हैं और इसी के साथ ही विश्वास प्रगाढ़ होता है.भूतों का मेला हर साल मकर सक्रांति के मौक़े पर लगता है. ये मेला लगभग एक माह तक चलता है. लोगों की ये मान्यता है कि जिन लोगों पर भूत-प्रेतों की छाया होती है, वो यहां आ कर अपनी समस्या का निदान पाते हैं.माना जाता है कि गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में आदिवासी ज़्यादा हैं. इन लोगों में भूत-प्रेतों को झाड़ू से भगाने की प्रथा है और बैतूल भी आदिवासी बहुल जिलों में से एक है. सच सिवाय विश्वास के और कुछ नहीं है. लोग आते हैं, उनकी दिक्कतें दूर होती हैं और इसी के साथ ही विश्वास प्रगाढ़ होता है.इस स्थान का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है. कहते हैं कि यहां 1770 ई के दौरान गुरुसाहब ने जीवित समाधि ली थी. यहां के पुजारियों का कहना है कि " यहां कई तरह के भूत, प्रेत, डायन, चुड़ैल और ज़िन्न आते हैं लेकिन उनके लिए गुरु साहब की एक झाडू ही काफ़ी है".लोगो का विश्वास है कि उल्टी परिक्रमा लगाते हैं भूत और कहा जाता है की लोग एषा करते है
जिन लोगों पर भूत-प्रेतों की छाया होती है, वो इस जगह उल्टी परिक्रमा लगाते हैं. इस मेले को ले कर कई बार विवाद भी हुआ है. इसे सीधे-सीधे अंधविश्वास से जोड़ कर देखा जाता है. प्रशासन ने मेले को बंद करवाने के कई प्रयास किए, लेकिन ऐसा हो न सका.गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में आदिवासी ज़्यादा हैं. इन लोगों में भूत-प्रेतों को झाड़ू से भगाने की प्रथा है और बैतूल भी आदिवासी बहुल जिलों में से एक है. सच सिवाय विश्वास के और कुछ नहीं है. लोग आते हैं, उनकी दिक्कतें दूर होती हैं और इसी के साथ ही विश्वास प्रगाढ़ होता है
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