Sunday, 1 November 2015

विचारों के लिये माहौल बेहतर बनाने के वास्ते सहिष्णुता तथा परस्पर सम्मान जरूरी है: रघुराम राजन

विचारों के लिये माहौल बेहतर बनाने के वास्ते सहिष्णुता तथा परस्पर सम्मान जरूरी है:  रघुराम राजन

 देश में बढ़ती असहिष्णुता पर चल रही बहस को आगे बढ़ाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि विचारों के लिये माहौल बेहतर बनाने के वास्ते सहिष्णुता तथा परस्पर सम्मान जरूरी है और किसी समूह विशेष को शारीरिक क्षति पहुंचाने या अपमानजनक शब्द कहने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

राजन ने कहा कि भारत की विचार विमर्श की परंपरा और सवाल उठाने की मुक्त भावना आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हरेक सत्ता और परंपरा को चुनौती देने को प्रोत्साहन देने से सत्ता में होने के कारण किसी खास विचार या विचारधारा को थोपने की संभावना खारिज नहीं रहेगी।

दादरी में एक व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डालने और इसके बाद हुई हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर बढ़ती असहिष्णुता की पृष्ठभूमि में राजन ने यह भी कहा कि सवाल खड़ा करने और चुनौती देने के अधिकार की रक्षा भारत की वृद्धि के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा ‘सहिष्णुता का अर्थ है किसी विचार के प्रति इतना भी असुरक्षित नहीं हों कि कोई उसे चुनौती न दे दे। यह कुछ हद तक अनासक्त होना है जो परिपक्व विमर्श के लिए बेहद आवश्यक है।’

अपने पूर्व संस्थान आईआईटी दिल्ली में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुये राजन ने कहा ‘आखिरकार, ऐसे दुर्लभ मामलों में जहां विचार किसी समूह के मूल चरित्र से गहरे जुड़े हों वहां सम्मान की जरूरत है और ऐसे मामलों में चुनौती देते समय हमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है।’ उन्होंने कहा कि सहिष्णुता से विचार-विमर्श में आने वाला रोष खत्म किया जा सकता है और सम्मान भी बना रह सकता है।

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राजन के भाषण पर टिप्पणी करते हुए ट्विटर पर कहा, ‘उन्हें रिजर्व बैंक जाकर अपना काम करना चाहिए। उन्हें बुजुर्गों की तरह नहीं बोलना चाहिए।’ पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि क्या अब भी भाजपा यही कहेगी कि प्रणब मुखर्जी और रघुराम राजन का असहिष्णुता के खिलाफ आज का भाषण भी ‘कृत्रिम विरोध’ था।

भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘हम उनके बयान का स्वागत करते हैं। सहिष्णुता है, इसीलिए हम प्रगति कर रहे हैं।’ राजन ने अमेरिका की मिसाल देते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय झंडे को जलाने से वैसी प्रतिक्रिया नहीं होती क्योंकि समाज समय के साथ इसके प्रति सहिष्णु हो गया और अब इसका उपयोग किसी को झटका देने के लिये नहीं किया जाता।

उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर यदि समूह की भावना ज्यादा सहिष्णु हो जाती है और इसे असानी से चोट नहीं पहुंचाई जा सकती तो आप चोट पहुंचाने का जो प्रयास करेंगे वह खत्म हो जायेगा।’ उन्होंने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा ‘आचार-व्यवहार परस्पर सहिष्णुता का स्वर्णिम नियम है क्योंकि हम सभी एक जैसा नहीं सोचेंगे और हम सत्य को टुकड़ों में तथा अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं।’

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